जब तेरे पिता तेरे साथ है – A poem on Father


We usually praise our mother for everything, and forget what all sacrifices our father does for us. This poem is all about the sacrifices a father makes for his children.

जब तेरे पिता तेरे साथ है – Is a small tribute to fatherhood.

अपने खून से सींचा मैंने नहीं है,
पर अंश तू मेरा है, परया नहीं है...

हु हर पल तेरे साथ मैं नहीं,
पर हु दूर तुझसे मैं नहीं...

तेरे चेहरे पे मुस्कान कई चीज़े दे जाती है,
उसे कमाने में मेरे उम्र निकल जाती है...

शिकायत ये नहीं, मेरे हालत ये है,
तेरे मुस्कान के लिए हे, हर पल हम साथ नहीं है...

बचपन में चुने मंदिर की घंटी को,
उठा लेते थे मेरे कंधे तुझे, उचाई देने को...

उन ऊँचाइयों पे तुझे जो पहुंचना है, 
कंधे के साथ, यहाँ मुझे भी थकना है…

ममता का अचल नहीं मेरे पास है,
कडवे बोल मेरे, तेरे आगे के रस्ते की मिठास है...

तू सुधरे, तू बिगड़े, ये तक़दीर तेरी, तेरे पास है,
तेरी तक़दीर मेरे नाम की पहचान है...

हु कहता नही मैं हर पल तुझसे जो, प्यार मुझे तुझसे है,
समझेगा तू एक दिन कभी, क्या तेरे पास है...

ममता का आंचल नही ये, लोहे की धार है,
है सब कुछ तेरे पास, जब तेरे पिता तेरे साथ है...
Advertisements

5 thoughts on “जब तेरे पिता तेरे साथ है – A poem on Father

Add yours

  1. ममता का अचल नहीं मेरे पास है,
    कडवे बोल मेरे, तेरे आगे के रस्ते की मिठास है…
    सुन्दर विवेचना
    आभार। “एकलव्य”

    Liked by 1 person

Leave back your thoughts for us.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

%d bloggers like this: