मेरी सासुमाँ कुछ ऐसी है


“मेरी सासुमाँ कुछ ऐसी है” – is a small short poem, to describe a different positive aspect of Mother in law, after all `Sasu Maa` is also MAA…

जब हाथों से सींचा था खुदा ने मुझे,
और फिर भेज रहा था ज़मीन पे मुझे…

एक सवाल सता रहा था मुझे,
संभालेगा कौन वहां मुझे…

कहा फिर खुदा ने मुझे,
हर मोड़ पे होगा एक खुदा वहां, जो संभालेगा मुझे…

अपने आंचल से बाँधा माँ ने मुझे,
अपनी डाट से संभाला टीचर ने मुझे…

हुए जब बरी मै, सासरे जाना था मुझे,
एक दर था, मानेगा कौन अपना वाहा मुझे…

मेरी माँ सा प्यार दिया उसने मुझे,
कभी बापू सा डांट दिया उसने मुझे…

कभी सेहली सा टहला दिया उसने मुझे,
कभी फिर भाई सा फटकार दिया मुझे…

था रूप उसमे सब जैसा, वो एक मूरत थी हर रिश्ते की…
बतो में मिठास ना हो कभी, तो सेहतमंद होती है वो करेले जैसी…

वो हर वक्त अच्छी ना सही, पर हर वक्त सची है…
मेरे रब (पति) से मिलने वाली, मेरी ससुमाँ कुछ ऐसी है…

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