Zindagi ek kashmakash hai…


Zindagi ek kashmakash hai…

राह मेरी ढूंडली है,
सफ़र मेरा बेमंज़िला है…

जाना मुझे कही नही है,
ठहरना मुझे अब यहा नही है…

रह मे एक मोर कही से आता है,
और सब कुछ चुरा कर ले जाता है…

एक कदम जो आगे बाराया है,
तो रास्ता बदल गया है…

राह की हर कातनैईयो मे जो साथ होते है,
रास्ता बदलते ही साथ छोर देते है…

जज़्बात सही यहा भी है, वाहा भी है,
दर्द जो वाहा है, वो यहा भी है…

जताना हर जसबात को गवारा कहा है,
मेरा दिल भी दुखा है, आँसू ये बेकार नही है…

उलझुए हुए हालत मे हम सब है,
इसलये ज्ञानी कहते है…

सही रह चुन पहा मुश्किल है,
क्यूकी ज़िंदगी एक कशमकश है…

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